Aarti of Goddess Saraswati

Om Jai Saraswati Mata, Jai Saraswati Mata. Vidya buddhi pradayak, tum ho sukhdata || Om Jai...... Kund indu sam shobha, tan ki jyoti jhare. Jo sevak bani aaye, sab bhandar bhare || Om Jai...... Veena dand kamandalu, mala kar sohai. Hansvahini devi, tribhuvan man mohai || Om Jai....... Shwet swaroopa sundari, shwet vastra dhaari । Shwet padam par baithi, sabko sukhkaari || Om Jai...... Brahma Vishnu Sadashiv, Indra aadi deva । Sanakadik aur Narad, sada karein seva || Om Jai...... Tum prataap son mata, moodh bhaye gyani । Nij daasan par karti, karuna kalyani || Om Jai.....Tribhuvan yash vistaar yo, gun gaavein deva. Sur nar muni sab nishidin, karein vividh seva|| Om jai....... Mateshwari ki aarti, jo koi nar gaave. Param gyaan so paave, jag yash phailaave || Om jai.......... Saraswati Maiya ki jai

Powerful Mantras of Goddess Saraswati

एकाक्षरी बीज मंत्र: ॐ ऐं (इसे वाग्बीज मंत्र कहा जाता है) Single-syllable seed mantra: "Om Aim" (this is known as the Vag-bija mantra).

द्विअक्षरी मंत्र: ॐ ऐं क्लीं।Bisyllabic Mantra: “Om Aim Kleem”.

अष्टाक्षरी मूल बीज मंत्र: ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।

Ashtakshari Mool Beej Mantra: Om Aim Saraswatyai Namah.

दशाक्षरी तांत्रिक मंत्र: Dashakshari Tantric Mantra: "Om Aim Hreem Shreem Kleem Saraswati Devyai Namah"ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सरस्वती देव्यै नमः 

वाक्सिद्धि तांत्रिक मंत्र: Vaksiddhi Tantric Mantra: "Om Aim Hreem Shreem Kleem Mahasaraswati Devyai Namah"ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः  

 
In the Rigveda, Goddess Saraswati is revered as the presiding deity of knowledge, speech, and intellect:
  • Vedic mantras cannot be translated into English.पावका नः सरस्वती:

    ॐ पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥ (अर्थ: पवित्र करने वाली, अन्न और बल से युक्त तथा बुद्धि को धन के रूप में देने वाली देवी सरस्वती हमारे यज्ञ का स्वीकार करें।)

  • महो अर्णः सरस्वती:

    ॐ महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुना। धियो विश्वा वि राजति॥ (अर्थ: सरस्वती देवी अपने प्रकाश से ज्ञान के महान समुद्र को चेतित करती हैं और समस्त बुद्धियों को सुशोभित करती हैं।)

    मुख्य रूप से ऋग्वेद में उनके कई सूक्त और मंत्र आए हैं:

    1. ऋग्वेद का प्रसिद्ध सरस्वती सूक्त (मण्डल 6, सूक्त 61)

    यह ऋग्वेद का सबसे प्रमुख और पूर्ण सरस्वती सूक्त माना जाता है, जिसमें 14 ऋचाएं (मंत्र) हैं।

    • ऋग्वेद 6.61.4:

      इ॒यम॒ददाद्रभ॒समृ॑णच्यु॒तं दि॒वोदा॑सं वध्र्य॒श्वाय॑ दा॒शुषे॑। या शश्वं॑तं आच॒खादा॑व॒सं प॒णिं ता ते॑ दा॒त्राणि॑ तवि॒षा स॑रस्वति॥

    • ऋग्वेद 6.61.10:

      उ॒त नः॑ प्रि॒या प्रि॒यासु॑ स॒प्तस्व॑सा॒ सुजु॑ष्टा। सर॑स्वती॒ स्तोम्या॑ भूत्॥ (अर्थ: सात बहनों/नदियों में अत्यंत प्रिय और सुपूजित देवी सरस्वती हमारी स्तुति के योग्य हों।)

    2. ऋग्वेद का पावका सूक्त (मण्डल 1, सूक्त 3)

    इस सूक्त की अंतिम तीन ऋचाएं (मंत्र 10, 11, 12) विशेष रूप से देवी सरस्वती की मेधा और वाणी शक्ति की स्तुति में हैं:

    1. ऋग्वेद 1.3.10:

      पा॒व॒का नः॑ स॒रस॑वती॒ वाजे॑भि॒र्वजि॑नीवती। य॒ज्ञं व॑ष्टु धि॒याव॑सुः॥ (अर्थ: पवित्र करने वाली, अन्न और बल से संपन्न तथा उत्तम बुद्धि रूपी धन देने वाली सरस्वती हमारे यज्ञ को स्वीकार करें।)

    2. ऋग्वेद 1.3.11:

      चो॒दयि॑त्री सू॒नृता॑नां॒ चेतं॑ती सुमती॒नाम्। य॒ज्ञं द॑धे॒ स॒रस॑वती॥ (अर्थ: सत्य और प्रिय वाणी को प्रेरणा देने वाली तथा श्रेष्ठ विचारों को जागृत करने वाली सरस्वती यज्ञ को धारण करती हैं।)

    3. ऋग्वेद 1.3.12:

      म॒हो अर्णः॑ स॒रस॑वती॒ प्र चे॑तयति के॒तुना॑। धियो॒ विश्वा॒ वि रा॑जति॥ (अर्थ: सरस्वती अपने ज्ञान-प्रकाश से चेतना के महान समुद्र को प्रकाशित करती हैं और समस्त बुद्धियों को सुशोभित करती हैं।)

    3. अन्य वेदों में उल्लेख

    • अथर्ववेद (काण्ड 18, सूक्त 1): इसमें भी वाग्देवी सरस्वती की मेधा, वाणी और कल्याणकारी स्वरूप की प्रार्थना के वैदिक मंत्र दिए गए हैं।

    • यजुर्वेद: यजुर्वेद के विभिन्न अध्यायों में यज्ञीय आहुतियों के समय सरस्वती जी के वैदिक मंत्रों का पाठ किया जाता है।

 

ऋग्वेद के छठे मण्डल का 61वां सूक्त (6.61) संपूर्ण वैदिक वांग्मय में भगवती सरस्वती का सबसे मुख्य और प्रसिद्ध सूक्त है। इसके ऋषि भरद्वाज बर्हस्पत्य हैं और इसमें कुल 14 मंत्र हैं।

पाठ की विधि

  • स्थान व समय: प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • आसन व सामग्री: कुशा या लाल/सफेद सूती आसन पर बैठें। सामने देवी सरस्वती का चित्र/यंत्र, जल का पात्र, अक्षत, सफेद/पीले फूल और घी का दीपक जलाएं।

  • संकल्प व आचमन: 3 बार आचमन कर शुद्ध हों और मन में मेधा (बुद्धि), ज्ञान तथा वाक्सिद्धि की प्राप्ति का संकल्प लें।

  • पाठ का तरीका:

    • यदि आपको स्वराघात (उदात्त, अनुदात्त, स्वरित) का ज्ञान है, तो सस्वर वैदिक पाठ करें।

    • यदि स्वर-ज्ञान न हो, तो बिना स्वर खींचे सामान्य स्पष्ट उच्चारण के साथ मंत्रों का पाठ करें।

    • प्रत्येक मंत्र के बाद देवी का ध्यान करते हुए अर्थ का चिंतन करें।

    • अंत में जल से आचमन करें और क्षमा प्रार्थना करें।

ऋग्वेद 6.61 (सरस्वती सूक्त) के प्रमुख मंत्र एवं हिंदी अर्थ

मंत्र 1:

इ॒यम॒ददाद्रभ॒समृ॑णच्यु॒तं दि॒वोदा॑सं वध्र्य॒श्वाय॑ दा॒शुषे॑।
या शश्वं॑तं आच॒खादा॑व॒सं प॒णिं ता ते॑ दा॒त्राणि॑ तवि॒षा स॑रस्वति॥

अर्थ: हे सरस्वती! आपने हविष्य देने वाले वध्र्यश्व राजा को ऋण से मुक्त करने वाला और शक्तिशाली पुत्र ‘दिवोदास’ प्रदान किया था। आपने अज्ञानी और कंजूस पणियों (शत्रुओं) का विनाश किया। हे देवी! आपके दिए हुए ये दान अत्यंत महान और शक्तिशाली हैं।

मंत्र 2:

इ॒यं शुष्मे॑भि॒र्बिस॑खा इवारुजद्‌ गि॒रीणां॑ त्त्वि॒षेभि॑रूर्मि॒भिः।
पा॒रा॒व॒तघ्नीमव॑से सुवृ॒क्तिभिः॑ स॒रस्व॑ती॒मा वि॑वासेम धी॒तिभिः॑॥

अर्थ: जैसे कोई तीव्र प्रवाह कमल के मृणाल/नाल को उखाड़ फेंकता है, वैसे ही यह सरस्वती अपनी प्रचंड तरंगों के वेग से पर्वतों के शिखरों को तोड़ देती है। ऐसी शत्रु-विनाशिनी देवी सरस्वती को हम सुंदर स्तुतियों और श्रेष्ठ विचारों द्वारा अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं।

मंत्र 3:

सर॑स्वति देव॒निदो॑ नि बर्हय प्र॒जां वि॒श्वस्य॑ बृस॒यस्य॑ मा॒यिनः॑।
उ॒त क्षि॒तिभ्यो॒ भव॑सीर॒वाव॑स॒मु॒तो तस्मे॑ त॒न्न्वं॑ १॒ फेन॑मुद्वम॥

अर्थ: हे सरस्वती! देवताओं की निंदा करने वालों और कपटी शत्रुओं की प्रजा का पूरी तरह विनाश करें। आप भक्तों को निवास के लिए भूमि और अन्न देने वाली हैं, तथा ज्ञान-विरोधी तत्वों का निवारण करने वाली हैं।

मंत्र 4:

उ॒त नः॑ प्रि॒या प्रि॒यासु॑ स॒प्तस्व॑सा॒ सुजु॑ष्टा।
सर॑स्वती॒ स्तोम्या॑ भूत्॥

अर्थ: सातों नदियों (या सात छंदों/वाणी की सात धाराओं) में अत्यंत प्रिय, सबको आनंद देने वाली और सुपूजित देवी सरस्वती हमारी सर्वदा स्तुति के योग्य हों।

मंत्र 7:

उ॒त स्या नः॒ सर॑स्वती॒ घोरा॑ हिरण्यव॒र्तनिः॑।
वृ॒त्र॒घ्नी व॑ष्टि सुष्टु॒तिम्॥

अर्थ: स्वर्णमय मार्ग वाली, अज्ञान रूपी वृत्रासुर का वध करने वाली और अत्यंत प्रभावशाली देवी सरस्वती हमारी श्रेष्ठ स्तुति को स्वीकार करें।

मंत्र 14 (अंतिम मंत्र):

सर॑स्वत्य॒भि नो॑ षेषि॒ वस्यो॒ मा फरी॑ः॒ सं नो॑ मा॒भ्या कः॑।
जु॒षस्व॑ नः स॒ख्या वे॒श्या॑ च॒ मा त्त्वत् क्षेत्रा॒ण्यर॑णानि गन्म॥

अर्थ: हे सरस्वती! हमें श्रेष्ठ ज्ञान और समृद्धि की ओर ले चलें। हमें ज्ञान से वंचित न करें। हमें कभी भयभीत न होने दें। हमारी मित्रता और सेवा को स्वीकार करें, ताकि हमें कभी अपने ज्ञान क्षेत्र से दूर या भटकना न पड़े।

फलश्रुति

इस सूक्त का नित्य पाठ करने से मेधा (स्मरण शक्ति) में वृद्धि, वाणी में मधुरता व स्पष्टता, विद्या-प्राप्ति में आ रही बाधाओं का नाश और मानसिक शांति मिलती है। विद्यार्थियों और साधकों के लिए इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

पौराणिक एवं एकादशाक्षर मंत्र

  • एकादशाक्षर मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः
  • स्मरण शक्ति एवं मेधा वृद्धि मंत्र: > ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।
    Puranic and Ekadsakshar Mantra
    Ekadshakshar Mantra: Om Aim Hreem Saraswatyai Namah
    Mantra to increase memory power and intelligence: > Om Hreem Aim Hreem Saraswatyai Namah.

Maa Saraswati Gayatri Mantra

ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥ Om Saraswatyai Vidmahe Brahmaputryai Dhimahi. Tanno Devi Prachodayat.

Maa Saraswati Gayatri Mantra (2)

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥ Om Vagdevyai Cha Vidmahe Kamarajaya Dhimahi. Tanno Devi Prachodayat.

॥ Sri Saraswati Dwadashnam Stotram(12 Names of Saraswati) ॥

सरस्वतीमहं वन्देवीणापुस्तकधारिणीम्।

हंसवाहसमायुक्तांविद्यादानकरीं मम॥1॥

प्रथमं भारती नामद्वितीयं च सरस्वती।

तृतीयं शारदा देवीचतुर्थं हंसवाहिनी॥2॥

पश्चमं जगति ख्याताषष्ठं वाणीश्वरी तथा।

कौमारी सप्तमं प्रोक्ताअष्टमं ब्रह्मचारिणी॥3॥

नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।

एकादशं क्षुद्रघण्टा द्वादशं भुवनेश्वरी॥4॥

ब्राह्मी द्वादशनामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।

सर्वसिद्धिकरी तस्य प्रसन्ना परमेश्वरी।

सा मे वसतु जिह्वाग्रे ब्रह्मरूपा सरस्वती॥5॥

॥ इति सरस्वतीद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

I bow to Goddess Saraswati, who holds the veena and a book.

Seated upon a swan, she is the bestower of knowledge to me. ॥1॥

First, she is called Bharati; second, Saraswati.

Third, she is Goddess Sharada; fourth, the Swan-Rider. ॥2॥

The sixth is renowned in the western world as Vāṇīśvarī.

The seventh is called Kaumārī; the eighth is Brahmacāriṇī. ॥3॥

The ninth is the bestower of wisdom, and the tenth is the granter of boons.

The eleventh is Kṣudraghaṇṭā, and the twelfth is Bhuvaneśvarī. ॥4॥

He who recites the twelve names of Brahmi at the three junctions of the day (dawn, noon, and dusk),

For him, the Supreme Goddess, who grants all accomplishments, becomes pleased.

May Saraswati, who is of the nature of Brahman, dwell upon the tip of my tongue. ॥5॥

॥ Thus ends the Saraswati Dvādaśanāma Stotra (Hymn of the Twelve Names of Saraswati). ॥

Maa Saraswati Sansthan

A religious trust dedicated to fostering knowledge, learning, education, culture, the cultivation of values, health awareness, and a spirit of patriotism.

Maa Saraswati Temple (under construction), Mathghoghra Road, Lakhnadon, District Seoni, Madhya Pradesh 480886

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